"हमारी संस्था की शुरुआत एक बहुत ही सरल विचार के साथ हुई थी: असली प्रगति तभी संभव है जब हम समाज के सबसे ज़रूरतमंद लोगों का हाथ थामें।
हम ग्रामीण समुदायों की उन खास ज़रूरतों को पहचानने के लिए दिन-रात काम करते हैं, जो उनके जीवन के लिए अनिवार्य हैं—जैसे साफ़ पानी, शौचालय और पक्के मकान की सुविधा दिलाना उन्हें एक सम्मानजनक जीवन देना। हमारा अटूट विश्वास शिक्षा और रोज़गार की ताकत में है।
तकनीकी संस्थानों और स्कूलो की स्थापना के माध्यम से हम न केवल अगली पीढ़ी को तैयार करना चाहते हैं, बल्कि दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास में भी पूरी मदद कर रहे हैं। मिट्टी से जुड़कर, हम अपने किसानों को जैविक खेती की नई तकनीकों से सशक्त बनाना चाहते हैं I
हमारी संस्था (Gram Pragati Rojgar Foundation) एक मज़बूत, स्वस्थ और अधिक दयालु भारत के निर्माण के लिए पूरी तरह समर्पित है।"
1. रोज़गार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण
हमारा प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर पैदा करना है। हम स्थानीय संसाधनों और आधुनिक तकनीक के बीच के अंतर को कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम छोटे और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करना चाहते हैं, ताकि युवाओं को काम की तलाश में अपने घर और परिवार को छोड़कर शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।
आज के प्रतिस्पर्धी युग में 'हुनर' ही सबसे बड़ी पूंजी है। हमारा मिशन युवाओं को उनकी रुचि के अनुसार तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। हम डिजिटल साक्षरता, हस्तशिल्प, कृषि-तकनीक और व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से एक ऐसी कार्यबल (Workforce) तैयार करना चाहते हैं जो न केवल नौकरी पा सके, बल्कि खुद का छोटा व्यवसाय भी शुरू कर सके।
हमारा संकल्प बिना किसी भेदभाव (जाति, धर्म या वर्ग) के समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा करना है। हमारा विशेष ध्यान निम्नलिखित वर्गों पर है:
गरीब और निराश्रित: जिन्हें बुनियादी सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता है।
अनाथ बच्चे: जिनके भविष्य को शिक्षा और स्नेह के माध्यम से संवारना हमारी प्राथमिकता है।
विधवाएं और बेसहारा महिलाएं: उन्हें सिलाई-कढ़ाई या अन्य लघु उद्योगों के माध्यम से आर्थिक आजादी दिलाना ताकि वे सम्मान के साथ जी सकें।
हमारा विज़न एक ऐसे 'सशक्त भारत' का निर्माण करना है जहाँ गरीबी और लाचारी किसी की प्रगति के आड़े न आए। हम एक ऐसे भविष्य की कल्पना करते हैं जहाँ अवसर सबके लिए समान हों।
हमारा विजन एक ऐसे राष्ट्र का है जहाँ हर हाथ को काम और हर काम को उचित सम्मान मिले। हम चाहते हैं कि भारत का हर गाँव आत्मनिर्भर (Self-reliant) बने, जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ और उच्च स्तरीय शिक्षा केवल अमीरों का विशेषाधिकार न रहकर हर नागरिक की पहुँच में हो।
हम केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों की स्थापना पर भी जोर देते हैं। हमारा उद्देश्य विभिन्न समुदायों, संस्कृतियों और धर्मों के बीच प्रेम, एकता और अटूट भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना है। हम एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते हैं जहाँ लोग एक-दूसरे के दुखों में सहभागी बनें और नफरत की जगह सहयोग का स्थान हो।
हमारा संकल्प क्षणिक बदलाव का नहीं, बल्कि पीढ़ियों को बदलने का है। हम चाहते हैं कि आज जिस बच्चे या युवा की हम मदद कर रहे हैं, कल वह इतना सक्षम बने कि वह दूसरों की मदद करने की स्थिति में हो। यही 'विकास का चक्र' (Cycle of Progress) हमारा अंतिम स्वप्न है।
"हमारे कर्म ही हमारी पहचान हैं। अपनी नेक नीयती और सेवा भाव से प्रेरित होकर, हम इन 8 मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो समाज के सर्वांगीण सुधार की नींव हैं:"
शिक्षा केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान के साथ जीने का जरिया है। ग्राम प्रगति रोज़गार फाउंडेशन(Gram Pragati Rojgar Foundation) का मानना है कि यदि एक बच्चा शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो यह केवल उस परिवार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की क्षति है। हमारे गाँवों में आज भी मेधावी छात्रों के पास प्रतिभा तो है, लेकिन उनके पास सही मार्गदर्शन और संसाधनों की कमी है।
हमारा फाउंडेशन इस खाई को पाटने के लिए निरंतर प्रयासरत है। हम न केवल गरीब बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, बल्कि उन्हें मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति (Scholarship) भी प्रदान करने के लिए अग्रसर हैं। हम डिजिटल साक्षरता पर भी विशेष जोर दे रहे हैं, ताकि ग्रामीण बच्चे शहर के बच्चों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकें। हमारा लक्ष्य आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक पुस्तकालय और 'स्मार्ट लर्निंग सेंटर' स्थापित करना है, जहाँ हर वंचित वर्ग का बच्चा आधुनिक तकनीक से जुड़ सके। हम शिक्षकों और अभिभावकों के बीच भी जागरूकता फैला रहे हैं ताकि वे शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य का निवेश समझें।
किसी भी समाज की प्रगति का पैमाना वहां के नागरिकों का स्वास्थ्य होता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है। छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी ग्रामीणों को मीलों दूर शहरों की ओर भागना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
हमारा दूसरा स्तंभ 'स्वास्थ्य' इसी समस्या का समाधान है। फाउंडेशन के माध्यम से हम नियमित स्वास्थ्य और जांच शिविर (Health Camps) आयोजित करने के लिए प्रयासरत हैं, जहाँ अनुभवी डॉक्टरों द्वारा मुफ्त परामर्श और दवाइयां दी जाएंगी । हमारा विशेष ध्यान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (Maternal and Child Health) पर है, ताकि कुपोषण जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म किया जा सके। हम भविष्य में 'मोबाइल हेल्थ वैन' की योजना पर काम कर रहे हैं, जो सीधे गाँव के दरवाजे तक इलाज पहुँचाएगी। इसके साथ ही, हम स्वच्छता अभियान और शुद्ध पेयजल की महत्ता पर भी जागरूकता फैला रहे हैं, क्योंकि बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। हमारा संकल्प है कि पैसे के अभाव में किसी भी निर्धन व्यक्ति का इलाज न रुके।
बेरोजगारी आज के समय की सबसे गंभीर चुनौती है, जो युवाओं को हताशा की ओर धकेल रही है। ग्राम प्रगति रोज़गार फाउंडेशन(Gram Pragati Rojgar Foundation) का स्पष्ट मानना है कि जब तक गाँवों में आर्थिक मजबूती नहीं आएगी, तब तक देश का पूर्ण विकास संभव नहीं है। शहरों की ओर होने वाला 'पलायन' गाँवों को खाली कर रहा है और शहरों पर दबाव बढ़ा रहा है।
हम इस पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन (Local Employment Generation) को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। हम सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSMEs) को प्रोत्साहित कर रहे हैं, जैसे कि खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), स्थानीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग। हमारा फाउंडेशन ऐसे स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान करने के लिए अग्रसर है जो ग्रामीण संसाधनों का उपयोग कर वहीं उत्पाद तैयार करते हैं। हम सरकारी योजनाओं और आम जनता के बीच एक सेतु का काम करते हैं ताकि पात्र युवाओं को मुद्रा लोन और अन्य वित्तीय सहायता आसानी से मिल सके। हमारा लक्ष्य है कि हर घर से कम से कम एक व्यक्ति आत्मनिर्भर हो, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़े और खुशहाली आए।
आज के डिजिटल और औद्योगिक युग में डिग्री से ज्यादा 'हुनर' (Skills) की मांग है। हमारा चौथा स्तंभ युवाओं को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना है। कौशल विकास के बिना रोज़गार की कल्पना करना अधूरा है।
फाउंडेशन के तहत हम विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम (Vocational Training) चलाने के लिए अग्रसर हैं। इसमें कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सिलाई, इलेक्ट्रिकल रिपेयरिंग और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण शामिल है। हम युवाओं को 'सॉफ्ट स्किल्स' और संचार कौशल (Communication Skills) भी सिखाएंगे, ताकि वे साक्षात्कार (Interview) में आत्मविश्वास के साथ बैठ सकें। हमारा विजन युवाओं को केवल 'नौकरी खोजने वाला' नहीं, बल्कि 'नौकरी देने वाला' (Entrepreneur) बनाना है। जब एक युवा के हाथ में हुनर होता है, तो वह न केवल अपना पेट पालता है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी काम देता है।
ग्रामीण विकास हमारे फाउंडेशन की आत्मा है। हमारा मानना है कि गाँवों का विकास केवल पक्की सड़कों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा और डिजिटल कनेक्टिविटी भी शामिल होनी चाहिए। भारत की प्रगति का रास्ता गाँवों की पगडंडियों से होकर ही गुजरता है।
हम ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर स्वच्छता, जल निकासी और सामुदायिक भवनों के सुधार पर काम के लिए अग्रसर हैं। खेती को लाभ का सौदा बनाने के लिए हम किसानों को 'स्मार्ट फार्मिंग' और 'सॉइल टेस्टिंग' जैसी तकनीकों से जोड़ना चाहते हैं। पशुपालन और डेयरी फार्मिंग को आधुनिक बनाकर हम ग्रामीण परिवारों की आय दोगुनी करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा, हम गाँवों में सौर ऊर्जा (Solar Energy) के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि बिजली की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। हमारा लक्ष्य गाँवों को इतना आधुनिक और सुविधा संपन्न बनाना है कि वे 'रर्बन' (Rurban - Rural + Urban) मॉडल के रूप में उभरें, जहाँ शहर जैसी सुविधाएं हों और गाँव जैसा शुद्ध वातावरण।
एक शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला पूरे समाज की दिशा बदल सकती है। हमारा छठा स्तंभ उन महिलाओं को समर्पित है जो सामाजिक और आर्थिक बेड़ियों में जकड़ी हुई हैं। विशेषकर विधवाओं, परित्यक्त और निराश्रित महिलाओं के लिए फाउंडेशन एक ढाल बनकर खड़ा होना चाहता है।
हम महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के माध्यम से संगठित कर उन्हें छोटे व्यवसाय जैसे कि अचार-पापड़ उद्योग, अगरबत्ती बनाना, सिलाई-कढ़ाई और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण देने के लिए प्रयासरत है। आर्थिक आजादी के साथ-साथ हम महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति भी जागरूक करते हैं। जब एक महिला आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती है, तो उसके बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है और समाज में उसका सम्मान बढ़ता है। हम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान को जमीनी स्तर पर लागू कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर लड़की को उच्च शिक्षा का अवसर मिले। नारी शक्ति का सशक्तिकरण ही एक न्यायपूर्ण समाज की पहचान है।
प्रकृति के बिना मानव जीवन का अस्तित्व संभव नहीं है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के संकट से जूझ रही है, तब पर्यावरण संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है। ग्राम प्रगति रोज़गार फाउंडेशन(Gram Pragati Rojgar Foundation) विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने में विश्वास रखता है।
हमारा सातवां स्तंभ 'पर्यावरण' पूरी तरह से आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य को समर्पित है। हम बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान (Afforestation) चलाने के लिए अग्रसर हैं I और 'एक व्यक्ति-एक पेड़' की अवधारणा को लोकप्रिय बना रहे हैं। इसके साथ ही, हम जल संरक्षण (Water Harvesting) के लिए पुराने तालाबों के पुनरुद्धार और वर्षा जल संचयन की तकनीकों पर काम करने के लिए प्रयासरत है I हम किसानों को पराली न जलाने और जैविक खाद का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे। हम प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण के लिए जागरूकता रैलियां और कपड़े के थैलों के वितरण जैसे कार्यक्रम भी करते हैं। प्रकृति की रक्षा ही वास्तव में मानवता की रक्षा है।
हमारा अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है—सामाजिक न्याय। समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, जातिवाद और भेदभाव प्रगति के सबसे बड़े बाधक हैं। ग्राम प्रगति रोज़गार फाउंडेशन(Gram Pragati Rojgar Foundation) एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जहाँ हर व्यक्ति को उसकी जाति, धर्म या लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी योग्यता और मनुष्यता के आधार पर सम्मान मिले।
हम अनाथालयों, वृद्धाश्रमों और विशेष रूप से सक्षम (Disabled) व्यक्तियों के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने के लिए प्रयासरत हैं। हमारा उद्देश्य समाज के उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा में शामिल करना और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति सचेत करना है। हमारा मिशन एक ऐसी न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाना है जहाँ कोई भी खुद को अकेला या कमजोर न समझे। हम मानते हैं कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सम्मान नहीं पहुँचता, तब तक हमारी आजादी अधूरी है।
100% गैर-लाभकारी : एक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में, हमारी आय का 100% बिल्कुल सामाजिक कल्याण और हमारे चैरिटेबल उद्देश्यों को प्राप्त करने में उपयोग किया जाता है।
कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं : हमारे किसी भी फंड का कोई हिस्सा किसी सदस्य या ट्रस्टी को लाभ या व्यक्तिगत फायदा के रूप में वितरित नहीं किया जाता।
जवाबदेही : हम यह सुनिश्चित करने के लिए कि हर दान सही स्थान पर पहुंचे, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा वार्षिक ऑडिट के साथ पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखते हैं
"मैंने 'ग्राम प्रगति रोज़गार फाउंडेशन'(Gram Pragati Rojgar Foundation) की स्थापना इस अटूट विश्वास के साथ की है कि समाज की सेवा ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है। हमारा लक्ष्य केवल मदद करना नहीं, बल्कि लोगों को इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें। हमारे पास आने वाला हर एक रुपया ज़रूरतमंदों के जीवन को बेहतर बनाने का एक ठोस संकल्प है।"
— विनय कुमार (संस्थापक एवं अध्यक्ष)